Shodh Manjusha: An International Multidisciplinary Journal

43. हड़प्पा कालीन नगर नियोजन: हरियाणा के सन्दर्भ में Harappan Town Planning: In the Context of Haryana

शोध आलेख सार
हड़प्पा सभ्यता विश्व पटल पर श्रेष्ठतम वैज्ञानिक सभ्यता है । मानवता के विज्ञान और प्रौद्योगिकी के आयामों में निरन्तरता एवं आंकलन से इसकी तकनीकी पृष्ठ भूमि का स्तर धरा पर सर्वश्रेष्ठ रहा है ।(i)  मानव के बौद्धिक विकास जिसमें महानगरों का निर्माण, उच्चनगर, निम्ननगर, रक्षा प्राचीर, आपसी नगरों से सहसम्बन्ध पक्की गलियां, भवनों, सड़कों की समकोण, ज्योमितीय प्रौद्योगि की पक्की ईंटों से निर्माण । ज्यामितीय सांचे ईंटों के आकार, जिसमें आनुपातिक 1ः2ः4 एवं 1ः2ः3 स्तर की पक्की एवं कच्ची ईंटों का निर्माण करना था । इसके अलावा नगरों की एक व्यवस्थित प्रणाली से निर्माण, साफ-सफाई, वातावरण का विशेष ध्यान, सूर्य का प्रकाश नगर के ज्यादातर भागों को प्रभावित करें । इस दिशा में निर्माण किया गया था । दिशा के विशिष्ठ जानकार भी थे ।

मुख्य शब्दः वृषभ, दुर्ग, रक्षा-प्राचीर, बुर्ज, खाई, उच्चनगर, निम्ननगर, पुराअवशेषों, पुरास्थलों, उत्खनन।

परिचयः
हड़प्पा सभ्यता विश्व पटल पर श्रेष्ठतम् वैज्ञानिक सभ्यता है । इसको तुलना विश्व की सभ्यताओं मिस्त्र, मसोपोटामिया, चीन बेबीलीनियां या अन्य विशिष्ठ सभ्यताओं में विज्ञान के आंकलन में की जाती है ।i यह सभ्यता विश्व की अन्य सभ्यताओं में वैज्ञानिक स्तर पर अपना स्थान सर्वोच्च बनाये हुए है । इस सभ्यता को सिन्धु सभ्यता Indus Civilization कहा जाता था ।ii इसे हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता था । सबसे पहले चार्ल्स-मसोनiii Charles Masson ने 1826 ई॰ में हड़प्पा नामक स्थान पर विशाल टीलों के विषय पर लिखा था, परन्तु इस दिशा में किसी भी व्यक्ति का ध्यान नहीं गया था।वैसे देखा जाए तो इसकी खोज अप्रत्याशित एवं आकस्मिक ढंग से हुई है । जिसकी शुरूआत 1856 ई॰ में कराची से लाहौर तक रेलवे लाइन बिछाने के समय में हुई थी । जॉन विलियम ब्रंटन iv ने ईंटों के ढेरों से टुकड़े या रोड़ों की पूर्ति के लिए हड़प्पा के प्राचीन टीलों से ईंटें खोदकर निकालने का निर्णय लिया, इन टीलों की खुदाई के दौरान प्राचीन वस्तुएं पुराअवशेष के रूप भी प्राप्त हुई । जिनमें से कुछ चिन्ह् युक्त पुराअवशेषों को भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के सर्वेयर जनरल अलेक्जेण्डर कनिंघम के पास भेजा गया था । इन पुरावस्तुओं में हड़प्पा संस्कृति की मोहर, उसके ऊपर वृषभ, छपा हुआ था । इन पुरावस्तुओं की जांच के लिए स्वयं अलेकजेण्डर कनिंघम ने 1853 ई॰ एवं 1856 ई॰ के दौरान हड़प्पा पुरास्थल का दौरा किया था । यहां से मिली वस्तुओं में ईंटों पर हाथी, बाघ, सांड आदि चित्रों के साथ-साथ छः अक्षर भी अंकित थे ।vi लेकिन इसके ऐतिहासिक स्वरूप को समझा ना जा सका । और एक लम्बे समय तक यह संस्कृति ऐसे ही अनभिग रही है । लेकिन एक लम्बे समय के बाद भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग के महानिर्देशक जार्न मार्शल के निर्देश पर 1921 ई॰ में पुरातत्त्ववेता दयाराम साहनी ने पंजाब (पाकिस्तान) के शाहीवाल जिले में रावी नदी के बायें तट पर स्थित हड़प्पा के टीले का पुनसर्वेक्षण किया गया था ।vii जिसके पुराअवशेषों से एक विशाल सभ्यता के उदय का प्रकाश दिखलाई दिया था । जो इस विश्व धरा पर सबसे बड़ी वैज्ञानिक आवरण में सम्माहित सम्पूर्ण संस्कृति को लिए हुई थी । इसकी आरम्भिक कड़ी में नगर नियोजन की कार्य प्रणाली की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से निर्मित एक विशाल साम्राज्य के उद्भव की जानकारी मिली है । नगर योजना दुर्ग-जिसमें उन्नत नगर नियोजन और स्थापत्य कला में हड़प्पा की विशिष्ठ तकनीक थी ।
हड़प्पा कालीन नगरों का निर्माण शतरंज पद्धति से निर्मित है। जिसमें सड़के सीधी व नगर चौकोर थे । सड़के एक-दूसरे को समकोण पर काटती थी । जिससे नगर अनेक आयताकार खण्डों में विभक्त हो जाते थे । नगरों में मुख्य मार्ग उत्तर से दक्षिण व दूसरा मार्ग पूर्व से पश्चिम जाकर पहले मार्ग को समकोण पर काटता था । ऐसे ही एक सुनियोजित प्रणाली से उच्चनगरों व निम्न नगरों का निर्माण किया गया था । नगरों में उच्च भू-भागों पर विशाल भवन, मकानों का एक व्यवस्थित प्रणाली की ज्यामितीय प्रौद्योगिकी से निर्माण किया जाता था । इसके अलावा आमजन, कारीगरों, कर्मचारी, व्यापारी, कृषक वर्गो के भवनों, मकानों का निर्माण निम्न नगर से व्यवस्थित किया जाता था ।
स्त्रोत: पुरातात्त्विक स्त्रोत

  1. भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग दिल्ली
  2. हरियाणा में उत्खनन पुरास्थलों की रिपोर्टो के आधारपर ।
  3. हरियाणा में सर्वेक्षण के दौरान प्राप्त पाषाण उपकरणों के आधार पर ।
  4. हड़प्पा सभ्यता से सम्बन्धित पुस्तकें एवं शोध प्रबन्ध, रिपोर्ट, गजेटियर के आधार पर आंकलन ।

नगर नियोजन की मुख्य विशेषताएं:

  1. नगर निर्माण की योजना संगठित स्वरूप में थी ।viii
  2. नगरों को ग्रिड प्रणाली की प्रौद्योगिकी से निर्माण किया गया था ।
  3. विशिष्ठ रूप से नगर को दो भागों में विभक्त किया गया था । (क) दुर्ग (उच्च नगर ब्पजंकमस) (ख) निचला नगर (स्वूमत ज्वूद)
  4. उच्च नगर में साहुकार/प्रशानिक, भवन,ix अनाज, गोदाम, स्नानाघर । विशिष्ठ जनों का निवास था ।
  5. निचला नगर-आम जनता के लिए, जिसमें कारीगर, व्यापारी, कृषक, कामगार  मजदूरों का निवास स्थान था ।
  6. भवनों, नगरों का निर्माण पक्की ईंटों से x ज्यामितीय प्रणाली से किया गया था । जिसमें आनुपातिक 1ः2ः4, व 1ः2ः3 रहा है ।
  7. जल निकासी प्रणाली भी श्रेष्ठ थी, जिसमें घरों से गंदा पानी संगठित छोटी नालियों से मुख्य नालियाँ में पड़ता था । नालियों को ढक्कन से ढ़का जाता था ।
  8. नगर के हर घर में कुएं और स्नानाघर थे । जिनसे शुद्ध पानी की प्रणालिक व्यवस्था थी । हर घर में स्नानघर भी थे । जिनका गन्दा पानी छोटी नालियों से बड़ी नालियों में पड़ता था।
  9. नगरों के मकानों का आकार बड़ा होता था । जिसमें बड़े-बड़े कमरे, रसोईघर, स्नानघर, शौचालय, और एक बड़ा सा आंगन जिसमें कुंआ ज्यादातर पुरास्थलों से मिला है ।
  10. हड़प्पा कालीन नगरों में बड़े-बड़े अनाज भण्डारण गोदाम भी मिले हैं ।

हरियाणा के संदर्भः

हरियाणा के बनावली  पुरास्थल से प्रारम्भिक हड़प्पा के तीन मी॰ मोटे जमाव के पुराअवशेष मिले है ।xi यहां की बस्ती, नगर की चारों तरफ से सुरक्षा दीवार से घिरी हुई थी । इस पुरास्थल की प्रौद्योगिकी में दुर्ग ऊपरी नगर एवं निचले नगर की आन्तरिक सुरक्षा दीवार (रक्षा प्राचीर) अलग करती थी ।xii यह दीवार अर्द्ध गोलाकार आकार की और 105 मी॰ लम्बी थी ।xiii इस दीवार के मध्य में रास्ता था । जो दोनों दुर्ग नगर और निचले नगर की बस्तियों के आपसी सम्पर्क आने-जाने का सामान्य रास्ता था । यह ऊपरी नगर व निचले नगर की एक ही सुरक्षा रक्षा प्राचीर थी ।xiv बनावली परिपक्व हड़प्पा कालीन पुरास्थल की यह रक्षा-प्राचीर चतुर्भज आकार की थी । इस नगर की निर्माण प्रौद्योगिकी शतरंज के आकार की लगती हैं ।

इसी तरह बालू पुरास्थल से दुर्ग से साक्ष्य मिले हैं । जिसमें दुर्ग का निर्माण कच्ची ईंटों की दीवार जिसका आधार 12 मी॰ चौ॰ जिसकी ऊँचाई में भीतर व बाहरी ओर पतला आकार दिया गया है।xv जो उत्तर-दक्षिणी 108 मी॰ व पूर्व-पश्चिम 96 मी॰ के भू-भाग को घेरे हुए प्रतीत होता है ।xvi इसके साथ-साथ उत्तरी दीवार में विशाल बुर्ज ज्वूमते की व्यवस्था की गई थी । इसका आकार 15-10 मी॰ चौड़ा इसके निर्माण की संरचना ऊपर की तरफ जाते हुए पतली की गई है ।xvii भिरड़ाना पुरास्थल से भी सुरक्षा दीवार के प्रमाण मिले हैं । यहां से 5 मीटर चौ॰ और इसकी निर्माण प्रौद्योगिकी में सात कोर्स लेयर प्राप्त हुई है । यह रक्षा दीवार नगर के चारों तरफ बनाई गई, जिसका निर्माण कच्ची ईंटों से किया गया था। इस नगर में प्रवेश द्वारा दक्षिण-पश्चिमी का कौना था । राखीगढ़ी पुरास्थल जो हड़प्पा, और मोहनजोदड़ों के बाद तीसरा बड़ा स्थान पुरातत्त्ववेता दर्शाते है । यहां पर दुर्ग या गढ़ी नगर के रूप उत्खननकर्त्ता को मिला है । पुरातत्त्ववेत्ता अमरेन्द्र नाथ ने राखी गढ़ी के नाम में ‘राखी’ शब्द को रक्षा के स्वरूप में प्रस्तुत करता है ।xviii इस नगर के चारों तरफ एक मोटी, मजबूत रक्षा-प्राचीर से घिरा हुआ एक व्यवस्थित नगर के साक्ष्य मिले हैं । इस नगर की रक्षा-प्राचीरअन्दर के निर्माण में कच्ची ईंटों का उपयोग किया गया है । इसके अलावा बाहरी रक्षा-प्राचीर की दीवार पक्की ईंटों से निर्मित है । इस दुर्ग की उत्तर दक्षिण दिशा को लगभग 70 मी॰ लम्बी के उत्खनन में प्रमाण मिले हैं । सुरक्षा-प्राचीर के एक विशिष्ठ सहयोग में खाई के प्रमाण बनावली पुरास्थल से मिले है । यहां पर खाई 5.70 मी॰ चौड़ी तथा 3.60 मी॰ गहरी बनाई गई है ।xx इसका उपयोग दो स्तरों में किया जाता था । एक सुरक्षा चक्र दूसरा जल निकासी की व्यवस्था में उपयोगी था।
हड़प्पा सभ्यता विश्वपटल पर श्रेष्ठतम् वैज्ञानिक सभ्यता है । जो अपनी सभ्यता संस्कृति में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की सर्वोत्तम आयामों को सम्माहित किये हुए है । हरियाणा के संदर्भ में जिसका पुरातात्त्विक स्वरूप विश्व की अन्य सभ्यताओं से श्रेष्ठ है । यहां के दुर्ग नगर, निम्न नगर की बनाने की कलात्मकत्ता व बौद्धिक शक्ति युक्त एक सुनियोजित प्रणाली से एक विशिष्ठ प्रौद्योगिकी देखने को मिलती है । जिसमें उच्च नगर, निम्न नगर, भवन, मकानों, सड़कों, गालियों, शौचालयों, मृदमाण्ड, व्यापारियों, कारीगरों, मजदूरों, कृषकों सभी के लिए एक व्यवस्थित जीवन शृंखला के सभी स्वरूपों का निर्माण करना था । अपने नगरों को शतरंज पद्धति से निर्माण व बाहरी शक्तियों से साम्राज्य की सुरक्षा हेतु रक्षा-प्राचीर एवं खाई का निर्माण करना था । हरियाणा में बनावली, बालू, भिरडाना, राखीगढ़ी पुरास्थलों से उच्च नगरों व निम्न नगरों के निर्माण की एक व्यवस्थित स्थिति के प्रमाण मिलते हैं । जो इस काल खण्ड की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को इंगित करता है ।
निष्कर्ष:
अतः हरियाणा में हड़प्पा कालीन लोगों को एक सुनियोजित नगर बसाना और एक विकसित शहर बसाने की वैज्ञानिक तकनीक ज्ञात थी, पुरातात्विक उत्खननों से इस बात के प्रमाण मिलते हैं । हरियाणा जितने भी नजर हड़प्पा कालीन मिले वे उन्नत किस्म के है, गलियां नालियों की व्यवस्था सड़के मकान बनाने का ढंग, सब उन्नत अवस्था के प्राप्त हुई है इस प्रकार हम कह सकते है हरियाणा में हड़प्पाकालीन नगर निर्माण योजना अपनी पराकाष्ठा पर थी ।
संदर्भः

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Abstract

The Harappan civilization is one of the greatest scientific civilizations on the world stage. Its technological background, based on the continuity and assessment of humanity’s scientific and technological advancements, has been among the best on earth.Human intellectual development, including the construction of metropolises, high towns, low towns, defensive walls, interconnection of cities, paved streets, right angles in buildings and roads, geometric technology, construction using baked bricks. Geometrical moulds, shapes of bricks,This includes building using burnt and unbaked bricks in the ratio of 1:2:4 and 1:2:3. Furthermore, cities should be built in a systematic manner, with special attention to cleanliness, the environment, and sunlight affecting most parts of the city.Construction was done in this direction. There were also experts in this direction.

Statements & Declarations:

Peer-Review Method: This article underwent double-blind peer review by two external reviewers.

Competing Interests: The author/s declare no competing interests.

Funding: This research received no external funding.

Data Availability: Data are available from the corresponding author on reasonable request.

Licence: Harappan Town Planning: In the Context of Haryana © 2025 by  Rajesh Kumar and S.K.Vasisth is licensed under CC BY-NC-ND 4.0. Published by ShodhManjusha.